Sunday, August 1, 2010

dhire dhere mat le siski

धीरे धीरे मत ले सिसकी कौन सुनेगा ?
चीखें मार मार कर रो ले
अगर बहुत ज्यादा मन है
यूँ रोने से अधिक जरूरी
रोने का विज्ञापन है

सचमुच के रोने वाले तो
अब तक रोते बैठे हैं
झूठ मूठ रोने वालो का
सारा काम टनाटन है 
आंसू मोती बह जायेंगे
mitti men mil जायेंगे
अगर न koi dekhega तो कौन chunega 
धीरे धीरे मत ले सिसकी कौन सुनेगा  

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